कार्ड (CHORD) || CLASSICAL MUSIC                                          कार्ड (CHORD)

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पश्चातत्य संगीत में रचना की मधुरता बढ़ाने के लिए कार्ड्स प्रयोग करते है। कार्ड्स के द्वारा हार्मनी (स्वर – संवाद) उत्पन्न की जाती है जिसमें मेल खाते हुए स्वरों को एक साथ बजाते हैं। 3 या 3 से अधिक अनुकूल स्वरों को एक साथ गाने बजाने के कार्ड की रचना होती है कार्ड में जब सप्तक के किसी स्वर के साथ तीसरी और पाँचवाँ स्वर होता है तो उसे ट्रायड (Triad)कहते हैं जैसे -सा -ग -प या रे -म -ध अथवा प -नि -रे। कार्ड के तीनों स्वर एक साथ बजाये जाते हैं ,इसलिये उन्हें ट्रायड कहते हैं और स्वरलिपि में उन्हें एक दूसरे के नीचे लिखते हैं, जैसे –

सा -C

ग – E

प – G

जब ट्रायड कार्ड का तीसरा स्वर परफेक्ट नोट होता है अर्थात जब कार्ड के प्रथम और तीसरे स्वर में परफेक्ट इंटरवल होता है ,तो उसे कमान कार्ड (Common chord)कहते हैं। पाष्चात्य संगीत में मध्यम (F)और पंचम (G )को क्रमशः परफेक्ट फोर्थ और परफेक्ट फिफ्थ कहा गया है।  षडज – मध्यम (C – F )में 3 :4 व षडज – पंचम (C – G )में 2 :3 का अनुपात होता है। हिंदुस्तानी संगीत में इन्हें क्रमशः षडज – मध्यम संवाद और षडज – पंचम संवाद कहा गया है। पष्चिमी संगीत में जिन दो स्वरों में 2  : 3 या 3  : 4 का अनुपात हो ,उनमे परफेक्ट इंटरवल माना जाता है। कामन कार्ड के दो प्रकार हैं –

 (1 ) Major Common Chord (मेजर कॉमन कार्ड )

(2 ) Minor Common Chord (माइनर कॉमन कार्ड )

ऊपर दिये गये दोनों प्रकार के कार्डों में तीसरा स्वर परफेक्ट होता ही है।  किन्तु जब दूसरा स्वर मेजर (हिंदुस्तानी शब्दावली में शुद्ध )होता है तो उसे मेजर कॉमन कार्ड और जब ट्रायड कार्ड का दूसरा स्वर माइनर (कोमल ) होता है तो उसे माइनर कॉमन कार्ड कहते हैं। 

मेजर कार्ड :-

मुख्य तीन प्रकार के निम्न मेजर कार्ड होते हैं –

(1)सा + ग + प (C + E + G) Tonic Chord 

(2)म + ध + सं (F + A + C)Sub Dominant Chord 

(3)प + नि + रें (G + B + D)Dominant Chord

जिस स्वर से कार्ड की रचना होती है उसे कार्ड का रूटनोट या मूल स्वर कहते हैं। कार्ड का नामकरण मूल स्वर के नाम पर हुआ है। पाष्चात्य संगीत में सा को टोनिक ,म को सबदामिनेंट और प लो डामिनेंट  नोट कहा गया है। अतः सा + ग + प को टोनिक कार्ड ,म + ध + सां को सब डामिनेंट  कार्ड और प + नि + रें को  डामिनेंट कार्ड कहते हैं। इन कार्डों को बजाने से मनुष्य के मन में विभिन्न प्रकार के भावों का संचार होता है। उदाहरण के लिए प्रथम कार्ड से मनुष्य में वीरता ,साहस ,दृढ़ता ,धैर्य और सहनशीलता का भाव उत्पन्न होता  है। सब – डामिनेंट कार्ड से व्याकुलता ,पाश्चाताप ,अभिलाषा तथा चंचलता का भाव उत्पन्न होती है। इसी तरह डामिनेंट कार्ड से उदासीनता ,खिन्नता और गंभीरता का भाव मन में उत्पन्न होता है। 

मेजर कार्ड के तीनो स्वरों में 4 : 5 : 6 : का अनुपात होता है। इसलिये मूल स्वर की आंदोलन -संख्या अगर 40 है तो अन्य स्वरों की आंदोलन -सख्या क्रमशः 50 और 60 होगी। इसी तरह अगर मूल स्वर की आंदोलन 200 है तो दूसरे स्वर की आंदोलन – संख्या 200 गुणा 5 /4 =250 और तीसरी स्वर की आंदोलन 200 गुणा 6 /4 =300 होगी।

                                              


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